अपने इन अनोखे फैसलों से क्या कुछ नया कर पाएंगे जगन मोहन रेड्डी?

आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी इन दिनों अपने अनोखे फैसलों से सुर्खियों में हैं. देश में पहली बार पांच डिप्टी सीएम बनाने का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब वो तीन राजधानी बना रहे हैं. इसके अनुसार, विशाखापट्टनम को कार्यकारी, अमरावती को विधायी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाया जाएगा. इस फैसले को लागू करवाने के लिए उन्होंने बड़ा कदम उठाते हुए विधान परिषद को ही भंग करने का प्रस्ताव पास करवा दिया. क्योंकि तीन राजधानी बनाने का बिल परिषद में गिर गया था. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि कई डिप्टी सीएम और एक से अधिक राजधानी बनाने के पीछे मंशा क्या है और इससे रेड्डी को हासिल क्या होने वाला है? यह वाकई सत्ता का विकेंद्रीकरण है या फिर असंतुष्ट क्षेत्रों और नेताओं को साधने का मंत्र. हमने इसका जवाब राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई और वरिष्ठ पत्रकार आलोक भदौरिया से तलाशने की कोशिश की.

किदवई कहते हैं कि आमतौर पर डिप्टी सीएम इससे पहले भी बनते रहे हैं. यूपी में सत्ता बैलेंस और जातीय संतुलन साधने के लिए दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं. उनकी कितनी सुनवाई होती है ये अलग बात है. आंध्र प्रदेश में रेड्डी के मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय से एक-एक डिप्टी सीएम है. जाहिर है कि यह जातीय संतुलन और वरिष्ठ नेताओं को साधे रखने का फार्मूला है. लेकिन एक और बात भी है वो यह कि इसी बहाने इन सभी जातियों और क्षेत्रों का सरकार में बड़ा प्रतिनिधित्व हो गया है.


जहां तक तीन राजधानी बनाने का सवाल है तो कोई नया फैसला नहीं है. नया सिर्फ ये है कि तीन शहरों को राजधानी का तमगा मिल रहा है, जिसके सहारे इन शहरों का विकास होगा. पहले ही कई राज्यों में इस तरह का विकेंद्रीकरण है. जैसे- >>मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में है, जबकि हाईकोर्ट जबलपुर में. इंदौर में स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन का ऑफिस है.

>>यूपी में राजधानी लखनऊ है और हाईकोर्ट प्रयागराज में. शिक्षा बोर्ड और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन का मुख्यालय प्रयागराज में है.

>>महाराष्ट्र में विधानमंडल मुंबई के अलावा नागपुर में भी चलता है.>>जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन राजधानी जम्मू में है.

किदवई कहते हैं कि यह सब हमारे नीति नियंताओं ने सोच-समझकर ही किया होगा. सत्ता का विकेंद्रीकरण है. लेकिन इन प्रदेशों की सरकारों ने राजधानी के अलावा किसी दूसरे शहर को राजधानी का तमगा नहीं दिया है. जगनमोहन रेड्डी नया यही कर रहे हैं कि वो तीन शहरों को राजधानी का तमगा दे रहे हैं. इसी तमगे की वजह से इन शहरों में विकास के नए रास्ते खुलेंगे और जनता उसका फायदा उठाएगी. विशाखापट्टनम में आंध्र का सचिवालय बनेगा. अमरावती में विधानसभा होगी और और कुर्नूल में हाईकोर्ट होगा. अपने इन फैसलों से जगन की लोकप्रियता और बढ़ सकती है.

हालांकि वरिष्ठ पत्रकार आलोक भदौरिया कहते हैं कि जगन ने जमीनी नेता के तौर पर एक पहचान बनाई हुई है. अगर पांच डिप्टी सीएम और तीन राजधानी बनाने के पीछे वाकई उनकी मंशा ये है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो तो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी दिखेगी. लेकिन अगर वो सिर्फ असंतुष्ट धड़ों और क्षेत्रों की कोशिश भर कर रहे हैं तो उसका फायदा नहीं होगा. हालांकि अभी उन्हें इस प्रयोग का परिणाम देखने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए. अगर ये सत्ता का विकेंद्रीकरण है तो इसकी सराहना होगी लेकिन सिर्फ असंतुष्टों को साधने का साधन है तो फैसले कटघरे में खड़े होंगे.

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