वास्तुशास्त्र: हर रंग कुछ कहता है, जानिए रंगों के लिए क्या है वास्तु नियम

वास्तुशास्त्र: हर रंग कुछ कहता है, जानिए रंगों के लिए क्या है वास्तु नियम

आपको बता दें कि व्यक्ति के जीवन में उपयोग होने वाली हर एक चीज का वास्तुशास्त्र से संबंध माना जाता हैं वही घर की साज सज्जा में रंगों का उपयोग वास्तुशास्त्र की दृष्टि में एक शक्तिशाली उपकरण हैं। आस पास मौजदू रंगों के मुताबिक मनुष्य शारीरिक व मानसिक रूप से प्रभावित होता हैं। सत्व, रजस व तमस इन तीन प्रकार के गुणों से रंगो का गहरा संबंध माना जाता हैं।

बता दें कि आसमानी, हरे, सफेद और अन्य हल्के रंगों को सत्व माना गया हैं तीखे लाल, नारंगी और गुलाबी रंग रजस होते हैं जो इच्छाओं में वृद्धि करते हैं वही तामसिक रंग गहरे होते हैं। इनमें गहरे नीले, भूरे और काले रंग मुख्य माने जाते हैं। वही घर की सजावट में तामसिक रंगों की अवहेलना करनी चाहिए। ये रंग मनुष्य को सुस्त व आलसी बनाते हैं घर में सौहार्द वातावरण के लिए नम्र, हल्के व सात्विक रंगों का प्रयोग किया जाना चाहिए।


हल्के नीले और हरे रंग को वास्तु में स्वास्थ्य के प्राकृतिक स्त्रोत के रूप में देखा जाता हैं। ये रंग ठंडे और कोमल होते हैं व इनसे संयमित और शांतिमय विकंपन पैदा होता हैं। इन रंगों का प्रयोग घर के ड्राइंग रूम में करना उचित हैं। वही हल्के नीले रंग का बाथरूम भी वास्तुशास्त्र में शुभ माना गया हैं।

वही पीला रंग व्यक्ति के स्नायु तंत्र को संतुलित व मस्तिष्क को स​क्रिय रखता हैं। अतं: इस रंग को अध्ययन कक्ष या लाइब्रेरी में उपयोग करना लाभप्रद होगा। वही बैंगनी रंग को उत्साहवर्धक एवं अवसाद का नाश करने वाला माना जाने के कारण इसका उपयोग योग व साधना कक्ष या पूजा स्थल में शुभ होता हैं।

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