देश को एनपीआर से डरने की जरूरत नहीं है, विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं: अमित शाह

देश को एनपीआर से डरने की जरूरत नहीं है, विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं: अमित शाह

राज्यसभा में दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) पर आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया. अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में दंगा फैलाने वालों को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे. मोदी सरकार दंगों की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीकों से जांच कर रही है. विपक्ष द्वारा दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए जाने का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा, ‘मुझपर आरोप लगाइये लेकिन दिल्ली पुलिस पर नहीं. 36 घंटे के अंदर पुलिस ने हिंसा पर काबू पाया है. दंगों का 13 प्रतिशत इलाकों तक सीमित रहना पुलिस की सफलता है. मैं भरोसा देता हूं कि जिनके भी घर जले हैं, दुकाने जली है, जिन्होंने अपने अपनो को खोया है, मैं उन्हें भरोसा देता हूं कि एक भी दंगाई को छोड़ेंगे नहीं’

अमित शाह ने कहा, ‘दिल्ली में हिंसा के लिए आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन के घर से कई चीजे मिली. दंगा शांत होने के बाद आम आदमी पार्टी ने सेना तैनात करने को कहा. दंगे शांत होने के बाद सेना तैनात कैसे कर सकते थे.’


गृह मंत्री ने कहा, ‘दिल्ली में लोग नागरिकता कानून के लागू होने के बाद से हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे. नागरिकता कानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी. कांग्रेस कहती है कि सीएए अल्पसंख्यकों के खिलाफ है.’

एनपीआर से डरने की जरूरत नहीं
राज्यसभा में अमित शाह के बयान के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने एनआरसी और एनपीआर को लेकर सवाल किया. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, ‘मैंने खुद कहा है कि एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा. पहले के एनपीआर में भी नहीं मांगा जाएगा. जितनी जानकारी देनी है उतनी जानकारी आप एनपीआर में दे सकते हैं. जो जानकारी आपके पास नहीं है वो नहीं मांगी जाएगी. इस देश के किसी नागरिक को एनपीआर की प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है…

….कोई कॉलम खाली रहने पर हम उस पर डी (Doubtful) लगा देंगे ऐसा होने वाला नहीं है. फिर भी मैं कहता हूं, विपक्ष के किसी भी सदस्य को अगर संदेह है तो मैं गुलाम नबी आजाद औऱ आनंद शर्मा जी के साथ चर्चा के लिए तैयार हूं. आप कभी भी आ सकते हैं.’

अमित शाह, ‘मैं विपक्ष को कहता हूं कि सीएए और एनपीआर पर भ्रांति फैलाने का काम बंद करना होगा. आप लोग दिल्ली हिंसा पर बहस करें.’

भड़काऊ भाषण पर नेताओं पर साधा निशाना
अमित शाह ने कहा, ’14 दिसंबर को रामलीला मैदान में रैली हुई. वहां भड़काऊ भाषण दिया गया, आर पार की लड़ाई करने को कहा गया. 15 दिसंबर से शाहीन बाग का प्रदर्शन शुरू हुआ. हमने सिर्फ इतना कहा कि लोगों की परेशानी को ध्यान में रखो. उसके बाद से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. एक पार्टी के नेता ने 19 फरवरी को कहा कि हमारे 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी पड़ेगें. उसके बाद सीएए के खिलाफ प्रदर्शन सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गया.’

जज के ट्रांसफर पर भी दिया जवाब
हाईकोर्ट जज के ट्रांसफर पर भी अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, ‘इसको किसी केस विशेष के साथ ना जोड़ें, सरकार की मर्जी से नहीं होता है ये. सरकार खाली आदेश जारी करती है. कॉलेजियम तय करता है. ये क्या बात हुई कि केवल एक जज ही न्याय करेंगे. ये रूटीन ट्रांसफर है. मैं इस मानसिकता का विरोधी हूं कि एक ही जज फैसला करेगा. दूसरे जज पर भरोसा क्यों नहीं है. क्या बेतुकी बातें हम लोगों के सामने फैलाते हैं. हमारी न्याय प्रणाली को लेकर हम क्या संदेश दे रहे हैं.’

दंगा कराना हमारी फितरत नहीं है, हम दंगाइयों को जेल में डालते हैं
अमित शाह ने कहा ‘दंगों को आप मेरी पार्टी औऱ मेरी विचारधार से जोडऩा गलत है. दंगों में मारे गए लोगों में से 76 प्रतिशत लोगकांग्रेस के शासन में मारे गए हैं. दंगे कराना हमारी फितरत नहीं है. हंम दंगा करने वालों को ढूंढ-ढूंढकर जेल में डालने का काम करते हैं.’

बता दें कि आज राज्यसभा में दिल्ली हिंसा पर बहस हो रही है.इस दौरान जहां विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा वहीं सता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया. बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह एक विचित्र दंगा था क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ कि कोई विदेशी राज्याध्यक्ष भारत में था और दंगा हो गया. त्रिवेदी ने कहा कि यह एकमात्र ऐसे दंगे हुए जिनमें विपक्षी नेताओं द्वारा शांति की अपील नहीं हुई उल्टा भड़काने वाले बयान दिए गए.

बहस के दौरान सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि भड़काऊ बयान देने वालों पर अब तक एफआईआर नहीं की. कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि दिल्ली जल रही थी और प्रधानमंत्री 70 घंटों तक चुप थे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग नफरत का वायरस फैला रहे है.

सिब्बल ने कहा कि कई जगह पर पुलिस CCTV कैमरे तोड़ती हुई नज़र आई. इससे साफ होता है कि जो हिंसा में शामिल थे उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही थी. जिन लोगों का दंगों से कुछ लेना देना नहीं था ऐसे लोगों की मौतें भी हुईं. दिल्ली पुलिस किसके इशारों पर काम कर रही थी.

इससे पहले निचले सदन लोकसभा में भी बुधवार को इस मुद्दे को लेकर चर्चा हुई थी. ध्यान रहे कि राज्यसभा में विपक्ष ने दिल्ली हिंसा पर बुधवार को ही चर्चा कराने की मांग की थी. विपक्ष खत्म हो रहे दो अध्यादेशों पर भी चर्चा चाहता था. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा समेत तृणमूल के सांसदों ने दिल्ली हिंसा पर बुधवार को चर्चा का प्रस्ताव दिया था.

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