मंगलवार से शुरू होगी अयोध्या मामले की सुनवाई, कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के प्रशासनिक पक्ष पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

मंगलवार से शुरू होगी अयोध्या मामले की सुनवाई, कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के प्रशासनिक पक्ष पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि प्रशासनिक पक्ष में इस मसले पर विचार किया जायेगा कि क्या अयोध्या भूमि मामले में होने वाली सुनवाई की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग की जायेगी. अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की मंगलवार से दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू होने वाली है. न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पूर्व विचारक केएन गोविन्दाचार्य द्वारा अयोध्या मामले की रोजाना होने वाली सुनवाई का सीधा प्रसारण या इसकी रिकॉर्डिंग के लिए दायर याचिका में शीघ्र सुनवाई का उल्लेख किया.

इस पर पीठ ने विकास सिंह से कहा कि हमें मालूम नहीं है कि क्या हमारे पास कार्यवाही के सीधे प्रसारण या रिकार्डिंग के लिए उपकरण हैं. सिंह ने पीठ से कहा कि यदि कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने में कठिनाई हो, तो सुनवाई की रिकॉर्डिंग करायी जा सकती है. पीठ ने इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध अस्वीकार करते हुए कहा कि यह एक ऐसा विषय है, जो संस्थागत है और इस बारे में प्रशासनिक पक्ष में विचार किया जायेगा.


शीर्ष अदालत ने 26 सितंबर, 2018 संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मसलों का सीधा प्रसारण करने की अनुमति देते हुए कहा था कि यह खुलापन ‘सूरज की रोशनी’ की तरह है, जो सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पूर्व विचारक केएन गोविन्दाचार्य ने अयोध्या मामले की रोजाना होने वाली सुनवाई का सीधा प्रसारण या इसकी रिकॉर्डिंग कराने का अनुरोध करते हुए एक याचिका दायर की है.

इस याचिका में उन्होंने शीर्ष अदालत के पिछले साल के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जानने का अधिकार मौलिक अधिकार है. इसलिए अयोध्या मामले की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने के लिए आवश्यक आदेश पारित किया जाये. अयोध्या मामले में मध्यस्थता के प्रयास विफल होने के बाद प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने दो अगस्त को स्पष्ट किया था कि इस मामले की दैनिक आधार पर छह अगस्त से सुनवाई की जायेगी.

शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में अदालत ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति गठित की थी. इस समिति ने एक अगस्त को न्यायालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस विवाद का सर्वमान्य समाधन खोजने में हिंदू और मुस्लिम पक्षकार सफल नहीं हो सके.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर, 2010 में अपने बहुमत के फैसले में कहा था कि अयोध्या में विवादास्पद 2.77 एकड़ भूमि तीनों पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच विभक्त कर दिया जाये. हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में 14 अपीलें दायर की गयी हैं.

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