सिंधू ने विश्व चैंपियनशिप में रचा स्वर्णिम इतिहास

सिंधू ने विश्व चैंपियनशिप में रचा स्वर्णिम इतिहास

भारत की पीवी सिंधू ने जापान की नोजोमी ओकुहारा को रविवार को एकतरफा अंदाज में 21-7, 21-7 से हराकर विश्व बैडमिंटन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। सिंधू विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं हैं।

सिंधू ने बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल में हारने का गतिरोध आखिर आज तोड़ दिया और वह भारत की बैडमिंटन में पहली विश्व चैंपियन बन गईं। सिंधू पिछले दो साल विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में हारी थीं, लेकिन इस बार उन्होंने कोई चूक नहीं की और जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए ओकुहारा को पराजित कर दिया। ओलंपिक रजत विजेता सिंधू का विश्व चैंपियनशिप में यह पांचवा पदक है। वह इससे पहले दो रजत और दो कांस्य पदक जीत चुकी हैं। पांचवीं सीड सिंधू ने तीसरी सीड ओकुहारा को 38 मिनट में पराजित कर भारत में जश्न की लहर दौड़ा दी। सिंधू को 2016 के रियो ओलंपिक में रजत, 2017 की विश्व चैंपियनशिप में रजत, 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और 2018 की विश्व चैंपियनशिप में भी रजत पदक मिला था, लेकिन उन्होंने इस बार अपने पदक का रंग बदलते हुए उसे पीला कर दिया। सिंधू का 2019 में यह पहला खिताब है और यह खिताब भी उन्हें विश्व चैंपियनशिप में मिला, जिसका भारत को कई वर्षों से इंतजार था।


सिंधू ने फाइनल में जो प्रदर्शन किया वह बेमिसाल था और इस प्रदर्शन को लंबे अरसे तक याद रखा जाएगा। इस तरह भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में 25 अगस्त 2019 का दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। भारत के विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के इतिहास में अब कुल 10 पदक हो गए हैं जिनमें एक स्वर्ण, तीन रजत और छह कांस्य पदक शामिल हैं। इन 10 पदकों में अकेले सिंधू की पांच पदकों की भागीदारी है।

भारत का किसी विश्व चैंपियनशिप में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले 2017 में सिंधू ने रजत और सायना नेहवाल ने कांस्य पदक जीता था। ओकुहारा जैसी खिलाड़ी को दोनों गेम में 21-7, 21-7 से हराकर सिंधू ने साबित किया कि वह अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक की सबसे प्रबल दावेदार रहेंगी। सिंधू ने विश्व रैंकिंग में चौथे नंबर की खिलाड़ी ओकुहारा के खिलाफ अपना करियर रिकॉर्ड 9-7 कर लिया है।

ओलम्पिक रजत विजेता सिंधू ने क्वार्टरफाइनल में विश्व की दूसरे नंबर की खिलाड़ी ताइपे की ताई जू यिंग को, सेमीफाइनल में विश्व रैंकिंग में तीसरे नंबर की खिलाड़ी चीन की यू फेई को और फाइनल में विश्व रैंकिंग में चौथे नंबर की खिलाड़ी ओकुहारा को हराया। सिंधू का इस साल यह दूसरा और विश्व चैंपियनशिप में लगातार तीसरा फाइनल था। वह इस साल इससे पहले इंडोनेशिया ओपन के फाइनल में पहुंचीं थीं। सिंधू ने पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में और वल्र्ड टूर फाइनल्स में भी ओकुहारा को हराया था।

विश्व चैंपियनशिप में 2017 और 2018 में रजत पदक तथा 2013 और 2014 में कांस्य पदक जीत चुकी सिंधू ने खिताबी मुकाबले में ओकुहारा के खिलाफ तूफानी शुरुआत की और लगातार आठ अंक लेकर 8-1 की बढ़त बना ली। ओकुहारा ने जब अपना दूसरा अंक हासिल किया उस समय तक सिंधू के 16 अंक हो चुके थे। जापानी खिलाड़ी भारतीय खिलाड़ी के आक्रमक प्रदर्शन के सामने पूरी तरह बेबस हो चुकी थीं। सिंधू ने 21-7 पर पहले गेम को समाप्त कर दिया।

दूसरे गेम में भी पहले गेम जैसी ही कहानी रही। सिंधू ने 3-2 स्कोर पर लगातार छह अंक लिए और 9-2 से आगे हो गयीं। ओकुहारा के लिए अब सिंधू को रोकना मुश्किल हो गया। सिंधू ने फिर लगातार सात अंक लिए और 16-4 की बढ़त बनाकर खिताब पर अपना कब्जा सुनिश्चित कर लिया।

उन्होंने इस गेम को भी 21-7 पर समाप्त किया और भारत की पहली विश्व बैडमिंटन चैंपियन बन गईं। सिंधू ने इस तरह पिछले आठ महीने का खिताबी सूखा शानदार अंदाज में समाप्त किया। सिंधू ने अपनी खिताबी जीत से भारतीयों का पहले विश्व बैडमिंटन खिताब का सपना पूरा कर दिया। भारत को चैंपियनशिप में दूसरा पदक पुरुष एकल में कांस्य के रुप में मिला।

बी साई प्रणीत को सेमीफाइनल में हारने के बाद कांस्य से संतोष करना पड़ा। प्रणीत ने इसके बावजूद इतिहास बनाया और वह महान प्रकाश पादुकोण के 1983 में कांस्य पदक जीतने के 36 साल बाद इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। इस बीच महिला युगल में टॉप सीड जापानी जोड़ी मायु मत्सुमोतो और वकाना नागाहारा ने दूसरी सीड हमवतन जोड़ी युकी फुकुशिमा और सयाका हिरोता को एक घंटे 25 मिनट में 21-11, 20-22, 23-21 से हराकर खिताब जीता।

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