आरबीआई ने बदल दिया बैंका का ये नियम, जानकर हो जाएगें खुश

आरबीआई ने बदल दिया बैंका का ये नियम, जानकर हो जाएगें खुश

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों की खस्ता होती हालत को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल कुछ समय से ऐसा देखा जा रहा है कि निजी बैंक के सीईओ सैलरी तो भारी-भरकम लेते हैं, लेकिन बैंक के लिए उतमा काम नहीं करते हैं. ऐसे में आरबीआई ने ये फैसला किया है कि अब से इन सीईओ पर सख्ती बरती जायेगी. रिजर्व बैंक ने निजी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के वेतन के बारे में नियमों में ऐसा बदलाव किया है जिससे अब खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों के अधिकारी मोटी सैलरी नहीं ले पाएंगे. रिजर्व बैंक ने ये बदलाव काफी सोच समझ और कई अधिकारियों की सलाह लेने के बाद किया है. बैंक ने निजी और विदेशी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सीईओ, पूर्णकालिक निदेशकों (WTDs) और मैटेरियल रिस्क टेकर्स (MRTs) को मिलने वाले वेतन के लिए गाइडलाइन में बदलाव किया है. बदले हुए ये नियम अभी से नहीं बल्कि अगले साल से लागू किये जायेगें. रिजर्व बैंक की दी गई जानकारी की मानें तो ये नए नियम 1 अप्रैल, 2020 से लागू होंगे.बैंक का कहना है कि किसी बैंक का वित्तीय प्रदर्शन यदि खराब होता है तो उसके शीर्ष अधिका‍री को मिलने वाले वैरिएबल कम्पेनसेशन का हिस्सा शून्य तक किया जा सकता है. आपको बता दें कि वैरिएबल कम्पेनसेशन या वैरिएबल पे वेतन का वह हिस्सा होता है, जो प्रदर्शन पर आधारित होता है.ऐसे में अब बैंकों के अधिकारियों के लिए ये जरूरी हो गया है कि वो बैंक के लिए न सिर्फ काम करें बल्कि उसे प्रॉफिट में भी लेकर आये. इस नियमों के बदलाव को लेकर रिजर्व बैंक का कहना है कि ऊंची जिम्मेदारी के स्तर पर वैरिएबल पे का हिस्सा ज्यादा होना चाहिए. हालांकि कुल वैरिएबल पे फिक्स्ड पे के 300 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता. .


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