इस ट्रेन में आपका टिकट चेक करने नहीं आएगा ‘TT’ न मिलेगा रेलवे का कोई स्टाफ

इस ट्रेन में आपका टिकट चेक करने नहीं आएगा ‘TT’ न मिलेगा रेलवे का कोई स्टाफ

लखनऊ से दिल्ली के बीच शुक्रवार को तेजस एक्सप्रेस ट्रेन को ग्रीन सिग्नल मिलने के साथ ही देश में प्राइवेट ट्रेन की शुरुआत हो गई. सरकार ने अभी ऐसा प्रयोग के लिए किया है, कामयाब रहने पर रेलवे को प्राइवेट हाथों में दिया जा सकता है. देश भर के रेलकर्मी इसका विरोध करने के साथ ही रेलवे यूनियन प्राइवेट रेलवे के फेल होने की भविष्यवाणी भी कर दी है. रेलवे यूनियन ने चाहे जो सोचा हो लेकिन रेलवे बोर्ड की योजना बहुत आगे की है. बोर्ड की योजना तकरीबन डेढ़ सौ प्राइवेट ट्रेनें चलाने की है.

प्राइवेट ट्रेन में ऐसे होगी टिकट चेकिंग


प्राइवेट ऑपरेटर्स को ये छूट होगी कि वो अपनी ट्रेन में किराया तय करने के अलावा कैटरिंग, हाउसकीपिंग व टिकट चेकिंग स्टाफ रख सके. लोको पायलट, गार्ड और सिक्योरिटी गार्ड रेलवे के रहेंगे. इनके लिए ऑपरेटर रेलवे को फीस देंगे. अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने के लिए भी रेलवे ऑपरेटर से फीस लेगा.

तेजस एक्सप्रेस को रेलवे का ही एक उपक्रम आईआरसीटीसी एक प्राइवेट कंपनी का साथ मिलकर चला रही है. आगे पूरी तरह प्राइवेट हो जाने पर रेलवे बोर्ड ऑपरेटर्स के साथ कंसेशन एग्रीमेंट और फायदे में हिस्सेदारी ले सकेगा. यही नहीं, प्राइवेट ऑपरेटर्स पर रेलवे के कारखानों में बनी ट्रेनें खरीदने की भी शर्त नहीं रहेगी. वो चाहें तो विदेशों से भी ट्रेनें आयात कर सकेंगे.

प्राइवेट ट्रेनों की वजह से सामान्य ट्रेनें होंगी लेट, जाएंगी नौकरियां

ये कहना है ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्र का. उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड के इरादों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. मिश्र ने कहा कि प्राइवेट ट्रेनों में सिर्फ संपन्न लोग यात्रा कर पाएंगे. आम यात्रियों को परेशानी होगी क्योंकि प्राइवेट ट्रेनों को पहले रास्ता देने की वजह से सामान्य ट्रेनें लेट होंगी. टिकटिंग स्टाफ के हजारों लोग नौकरी से हाथ धो बैठेंगे.

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