आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को दोहरा झटका, खुदरा महंगाई उच्चतम स्तर पर, औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को दोहरा झटका, खुदरा महंगाई उच्चतम स्तर पर, औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को दोहरा झटका लगा है। एक ओर जहां महंगाई दर उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है तो दूसरी ओर ओद्यौगिक उत्पादन में दर्ज हुई है। पहले बात करते हैं कि महंगाई दर की। जहां खाद्य पदार्थो की कीमतें काफी बढ़ जाने की वजह से नवंबर में खुदरा महंगाई 5.54 फीसदी हो गई। यह अक्टूबर में 4.6 फीसदी थी। वित्त मंत्रालय की ओर से आधिकारिक आंकड़ा गुरुवार को जारी की गई।

इस तरह से नवंबर में खुदरा महंगाई दर तीन साल में सबसे ऊपर पहुंच गई है। इससे पहले जुलाई 2016 में खुदरा महंगाई दर 6.07 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में खाद्य महंगाई दर 7.89% से बढ़कर 10.01% हो गई है। नवंबर माह में ग्रामीण रिटेल महंगाई दर 4.29% से बढ़कर 5.27% हो गई है जबकि शहरी रिटेल महंगाई दर 5.11% से बढ़कर 5.76% हो गई है।

लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ने सांसद राहुल रमेश शेवाले और भर्तृहरि महताब के सवालों का लिखित जवाब देते हुए आवश्यक वस्तुओं की जो कीमत सूची सौंपी थी। उससे जाहिर होता है कि चावल, गेहूं, आटा, दाल, तेल, चाय, चीनी और गुड़ समेत सब्जियों और दूध के दाम में जनवरी के मुकाबले साल के आखिरी महीने दिसंबर में वृद्धि हुई है।


दूसरी ओर देश के औद्योगिक उत्पादन में गिरावट की स्थिति लगातार बनी हुई है। अक्टूबर महीने में औद्योगिक उत्पादन में 3.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसमें लगातार तीसरे महीने कमी आई। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में सितंबर में 4.3% और अगस्त में 1.1% गिरावट आई थी। पावर, माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में सुस्ती की वजह से इंडेक्स ज्यादा प्रभावित हुआ।

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