मंत्रालय ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए दिशानिर्देश, मदद के लिए बनेंगे कंट्रोल रुम

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान 24 घंटों के लिए कंट्रोल रुम बनाने के लिए कहा है। जिससे वस्तुओं और सेवाओं के प्रदाताओं की मदद हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए संपूर्ण देशबंदी की घोषणा की है। गृह मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी किए गए दिशा-निर्देशों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों से कहा गया है, ‘यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रावधान जमीनी स्तर पर उपलब्ध हैं, हर राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के लिए यह जरूरी होगा कि वह किसी भी शिकायत या समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन (राज्य/ ला स्तर पर) के साथ एक 24×7 नियंत्रण कक्ष/कार्यालय स्थापित करें। जिससे अंतर-राज्यीय माल/सेवाओं के प्रदाताओं की परेशानियों का हल हो सके।’

मंत्रालय के दिशा-निर्देश में कहा गया है कि ‘मानक संचालन प्रोटोकॉल’ (एसओपी) ‘आवश्यक सेवाओं/प्रतिष्ठानों और वस्तुओं के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है। इसमें अंतर-राज्य की सीमाओं पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, वाहनों के पास या ई-पास आदि से संबंधित मुद्दे भी शामिल हैं। मंगलावर को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि सामाजिक दूरी के जरिए ही इस बीमारी से निपटा जा सकता है क्योंकि यह काफी तेजी से फैल रही है।


अफवाहों की करें जांच
गृह मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वह खाने, जरूरी सामान की कमी वाली अफवाहों पर निगरानी रखें। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 21 दिन की लॉकडाउन अवधि के मद्देनजर राज्य सरकारों से भोजन की कमी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के बारे में अफवाहों के प्रसार की जांच करने को कहा है। मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें उन आशंकाओं पर कार्रवाई करने और शांति और व्यवस्था बनाए रखनी है और लोगों को भोजन, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के बारे में सूचित करना है।

मंत्रालय ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
गृह मंत्रालय ने मंगलवार को 21 दिन की संपूर्ण देशबंदी के दौरान सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू कर दिया है। जिसका उल्लंघन करने वाले को दो साल तक की सजा मिल सकती है। गृह मंत्रालय ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से 60 और आईपीसी की धारा 188 को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन धाराओं के तहत उलंलंघन करने वालों पर जुर्माना और दो साल तक जेल की सजा दी जा सकती है।

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