महाराष्ट्र: बाढ़ की वजह से दही हांडी का उत्साह रहा फीका

महाराष्ट्र: बाढ़ की वजह से दही हांडी का उत्साह रहा फीका

महाराष्ट्र  में आई भीषण बाढ़ की वजह से कोल्हापुर और सांगली जिलों में शनिवार को ‘दही हांडी’ का उत्साह फीका रहा। इसके अलावे मुंबई के विभिन्नहिस्सों में शनिवार को ‘दही हांडी’ का उत्साह फीका रहा। दहीं हांडी मंडलों और आयोजकों ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति एकजुटता प्रकट करने के लिए उत्सव को साधारण तरीके से मनाने का फैसला किया। कुछ मंडल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पैसे दान कर रहे है।

महाराष्ट्र में दही हांडी जन्माष्टमी उत्सव का हिस्सा है जिसमें युवा जिन्हें गोविंदा कहते हैं रंगबिरंगे कपड़ों में मानव पिरामिड बना दही की हांडी फोडऩे की कोशिश करते हैं। महिला गोविंदाओं के संगठन ‘गोरखनाथ महिला दही हांडी पाठक मंडल’ ने फैसला किया है कि उसके सदस्य केवल परंपरा को कायम रखने के लिए त्योहार मनाएंगे। मंडल के संस्थापक भाऊ कोरेगांवकर ने कहा, ”हम बाढ़ की वजह से मुश्किलों का सामना कर रहे अपने भाईयों और बहनों को नहीं भूल सकते। हमारी महिलाएं आयोजन स्थल पर जाएंगी और केवल दही हांडी फोड़ेंगी।


भव्य दही हांडी उत्सव आयोजित करने के लिए र्चिचत रहे भाजपा नेता राम कदम ने भी इस बार साधरण तरीके से उत्सव मनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, ”हम इस उत्सव को संस्कृति का हिस्सा होने की वजह से मनाएंगे, लेकिन यह साधारण तरीके से होगा। दिखावे पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है बचे हुए पैसे राज्य में आई बाढ़ से प्रभावित भाई-बहनों की मदद के लिए भेजा जाएगा।

भाजपा विधायक और राज्य की महिला एवं बासल विकास मंत्री विद्या ठाकुर ने कहा, ” महाराष्ट्र में आई बाढ़ की वजह से इस साल हम दही हांडी नहीं मना रहे हैं। उत्सव पर खर्च करने के लिए जाम एक रुपये बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दी जाएगी। मुंबई में दही हांडी मंडलों का समन्वय करने वाली दही हांडी समन्वय समिति के बाला पेडलकर ने कहा कि राज्य में बाढ़ को ध्यान में रखते हुए इस बार उत्सव का भव्य आयोजन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिज्ञ भी इसबार साधारण तरीके से दही हांडी उत्सव का आयोजन कर रहे हैं।

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