जानें, तुलसी से जुड़े ये वैज्ञानिक रहस्य

जानें, तुलसी से जुड़े ये वैज्ञानिक रहस्य

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह की परंपरा सदियों से चली आ रही है और लोग आज भी इस परंपरा को निभा रहे हैं। इस साल तुलसी विवाह 08 नवंबर यानि कल मनाया जा रहा है। इसके साथ ही इस दिन देवउठनी एकादशी का पर्व भी मनाया जाएगा। कहते हैं कि जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो तो वे लोग तुलसी जी का विवाह जरूर करवाएं। चलिए आगे जानते हैं तुलसी से जुड़ी वैज्ञानिक तथ्य-

वैज्ञानिक रहस्य
तुलसी एक नेचुरल एयर प्यूरिफायर है। ये पौधा 24 में से करीब 12 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। वनस्पति वैज्ञानिकों के अनुसार कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड व सल्फर डाईऑक्साइड जैसी जहरीली गैस भी सोखता है। तुलसी का पौधा वायु प्रदूषण को कम करता है। तुलसी का पौधा उच्छवास में ओजोन वायु छोड़ता है जिससे सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाव होता है।


इस तरह वायु प्रदूषण कम करने के लिये तुलसी का पौधा लगाना फायदेमंद है। वहीं धर्मग्रंथों के अनुसार देव उठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। तुलसी के पौधे का महत्व पद्मपुराण, ब्रह्मवैवर्त, स्कंद और भविष्य पुराण के साथ गरुड़ पुराण में भी बताया गया है। तुलसी का धार्मिक महत्‍व होने के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पौधा शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने के साथ बैक्‍टीरिया और वायरल इंफेक्‍शन से भी लड़ता है।

तुलसी पूजा
अनेक व्रत और धर्म कथाओं में तुलसी का महत्व बताया गया है। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा तुलसी दल के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण की कथा के अनुसार कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि पर तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी और शालिग्राम विवाह करवाने से हर तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीं तुलसी विवाह से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होते हैं।

धार्मिक महत्व
पद्म पुराण के अनुसार इनके दर्शन करने पर सारे पाप-समुदाय का नाश कर देती हैं और स्पर्श करने पर शरीर को पवित्र बनाती है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुंचाती हैं, आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप ले जाती है और भगवान के चरणों में चढ़ाने पर मोक्षरूपी फल प्रदान करती है, उस तुलसी देवी को नमस्कार है।

गरुड़ पुराण के धर्म काण्ड के प्रेत कल्प में लिखा है कि तुलसी का पौधा लगाने, उसे सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्म के पाप खत्म हो जाते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड में लिखा है कि मृत्यु के समय जो तुलसी पत्ते सहित जल पीता है वह हर तरह के पापों से मुक्त हो जाता है।

स्कन्द पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है और हर दिन उसकी पूजा होती है तो ऐसे घर में यमदूत प्रवेश नहीं करते। स्कन्द पुराण के ही अनुसार बासी फूल और बासी जल पूजा के लिए वर्जित हैं परन्तु तुलसीदल बासी होने पर भी वर्जित नहीं हैं। यानी ये अपवित्र नहीं मानी जाती।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण जन्म खंड में लिखा है कि घर में लगाई हुई तुलसी मनुष्यों के लिए कल्याणकारिणी, धन पुत्र प्रदान करने वाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देने वाली होती है। सुबह-सुबह तुलसी का दर्शन करने से सवा मासा यानि सवा ग्राम सोने के दान का फल मिलता है।

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