भारतीय राजनेता सिर्फ इनसे डरते थे, वो होते तो ऐसे नहीं फिसलती जुबान

भारतीय राजनेता सिर्फ इनसे डरते थे, वो होते तो ऐसे नहीं फिसलती जुबान

नई दिल्‍ली: 

सियासी पिच पर बैटिंग कर रहे नेता अब स्‍लेजिंग से भी बाज नहीं आ रहे।


योगी आदित्‍यनाथ  हों या मायावती , आजम खान हों या जयंत चौधरी , चंद्र बाबू नायडू  हों या अहमद पटेल , अर्जुन मोढवाडिया हों या चौधरी अजीत सिंह।

इन नेताओं की जुबानी जंग में जुबान ऐसे फिसल रही है जैसे सियासत की पिच पर किसी ने तेल डाल दिया हो।

सुप्रीम कोर्टकी सख्‍ती के बाद चुनाव आयोग ने थोड़ी सख्‍ती दिखाई है।

कुछ नेताओं की जुबान पर 72 घंटे तो कुछ पर 48 घंटे की पाबंदी लगाई है।

नेताओं की इस चुनाव में लंबी होती जुबान को छोटी करने के लिए टीएन शेषन ने जो काम किया था वैसा कभी नहीं हुआ।

तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन यानी टीएन शेषन के नाम ने देश को पहली बार चुनाव आयोग की ताकत बताई।

यही वह नाम है जिसके लिए कहा जाता था कि भारतीय राजनेता सिर्फ दो से डरते हैं।

पहला-ईश्वर और दूसरे शेषन से।

उन्होंने सभी जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अफसरों से कह दिया था कि एक भी गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही शेषन ने करीब 50,000 अपराधियों को ये विकल्प दिया था ।

वो अग्रिम जमानत ले लें या पुलिस के हवाले कर दें।

 

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