पिता के लिए भारत रत्न की भीख नहीं मांगूंगा: हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे

पिता के लिए भारत रत्न की भीख नहीं मांगूंगा: हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बेटे

तीन बार ओलंपिक जीतने वाले हॉकी लीजेंड मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने कहा है कि अवॉर्ड में राजनैतिक दखल ने उनके पिता को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से दूर रखा. भारतीय हॉकी टीम में कप्तान रह चुके अशोक ने खेल दिवस के मौके पर कहा ‘पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने दादा को भारत रत्न देने की फाइल पर साइन किए थे और तत्कालीन खेल मंत्री को इस बारे में बता दिया था.’

अशोक कुमार ने आगे बताया कि बाद में इस फैसले को खारिज कर दिया गया. ऐसा करके सरकार ने न सिर्फ हमें अपमानित किया बल्कि देश के बेहतरीन खिलाड़ी का भी अपमान किया है. अब यह सरकार पर है कि इस फैसले पर गौर करे कि ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए या नहीं.


बता दें कि 29 अगस्त को ध्यानचंद का जन्मदिन होता है और इस दिन को रखेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस मौके पर ध्यानचंद के बेटे अशोक ने कहा ‘अवॉर्ड मांगे नहीं जाते, अवॉर्ड की भीख नहीं मांगी जाती. जो हकदार हैं सरकार उन्हें अवॉर्ड देती है.’

ध्यानचंद की सरलता के बारे में बताते हुए अशोक ने कहा ’70 के दशक में दादा को झांसी में एक कार्यक्रम में बुलाया गया. आयोजकों ने वाहन भेजने में देर की तो दादा पड़ोसी के साथ साइकिल पर बैठकर कार्यक्रम में पहुंच गए. आयोजकों को इस बात पर शर्मिंदगी हुई लेकिन उन्हें तब और हैरानी हुई जब दादा ने कहा कि वे अपने दोस्त के साथ साइकिल पर आए हैं और उसी के साथ वापस जाएंगे.’

अशोक ने ध्यानचंद की प्रसिद्धि के बारे में बताया कि ‘उनके खेल को उस समय बॉलीवुड के स्टार केएल सहगल, पृथ्वीराज कपूर, अशोक कुमार जैसे दिग्गज देखा करते थे. 1930 के दशक के आखिर में मेरे पिता गांघी के बाद यूरोप में दूसरे सबसे चर्चित भारतीय थे.’

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