रात को उठकर खाती हैं खाना, कहीं आपको नाइट ईटिंग सिंड्रोम तो नहीं

रात को उठकर खाती हैं खाना, कहीं आपको नाइट ईटिंग सिंड्रोम तो नहीं

जब आप नाइट ईटिंग सिंड्रोम के बारे में सुनती हैं तो यकीनन आपके मन में ऐसी छवि बनती होगी कि इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति रात में नींद में ही अपने बेडरूम से रसोई तक जाकर सोते हुए ही काफी सारा भोजन करता है और सुबह इसके बारे में याद भी नहीं होता। अगर आप भी ऐसा ही सोचती हैं तो आप गलत है। नाइट ईटिंग सिंड्रोम वाले लोग जब खा रहे होते हैं, तब वह पूरी तरह से सचेत होते हैं और आमतौर पर स्नैक के आकार के हिस्से खाते हैं। नाइट ईटिंग सिंड्रोम वास्तव में एक ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें रात के खाने के बाद भी व्यक्ति कुछ न कुछ खाने की इच्छा होती है। यहां तक कि जब आप रात में उठते हैं, तब भी फ्रिज खोलकर कुछ न कुछ खाना चाहते हैं। हालांकि यह समस्या इतनी बड़ी नहीं है, लेकिन इसके कारण आपको अन्य कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल हो सकती हैं। तो चलिए आज हम आपको नाइट ईटिंग सिंड्रोम से जुड़ी कुछ बातों के बारे में बताते हैं-

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर से है अलग


कुछ लोग नाइट ईटिंग सिंड्रोम को बिंज ईटिंग डिसऑर्डर समझ लेते हैं। हालांकि इन दोनों में कई समानताएं हैं, लेकिन फिर भी यह एक-दूसरे से अलग हैं। जहां नाइट ईटिंग सिंड्रोम एक विशेष समय पर होती है, जैसे रात को खाने के बाद या फिर लेट नाइट, जबकि बिंज ईटिंग डिसऑर्डर में व्यक्ति को किसी भी समय खाने की इच्छा हो सकती है। इतना ही नहीं, नाइट ईटिंग सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति का लिया गया आहार व कैलोरी काउंट अपेक्षाकृत कम होता है।

दिन में खाते हैं कम

नाइट ईटिंग सिंड्रोम वाले व्यक्ति अमूमन दिन में कम ही खाते हैं। उन्हें सुबह या दोपहर के समय ना के बराबर भूख लगती है। जबकि वह देर शाम को अधिक भोजन करते हैं। इतना ही नहीं, रात के खाने के बाद वह अक्सर कुल दैनिक कैलोरी का 25 प्रतिशत या उससे अधिक लेते हैं।

नींद की कमी

नाइट ईटिंग सिंड्रोम वाले व्यक्ति जब रात में भोजन करते हैं, उस समय वह जागे हुए होते हैं। उन्हें यह याद होता है कि उन्होंने कब और कितना खाया है। कई बार तो वह खाने की इच्छा में रात को जाग भी जाते हैं। लगातार ऐसा करने से उन्हें नींद की कमी या इनसोमनिया की समस्या का भी सामना करना पड़ता है।

हर उम्र के होते हैं प्रभावित

नाइट ईटिंग सिंड्रोम यूं तो बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी को प्रभावित करता है, लेकिन व्यस्क व्यक्ति में यह समस्या सबसे अधिक देखी जाती है। ज्यादातर युवा कॉलेज टाइम में ही नाइट ईटिंग करना शुरू कर देते हैं। वहीं प्रोफेशनल कई बार लेट नाइट काम करते हुए नाइट ईटिंग करते हैं या फिर काम के प्रेशर के चलते देर रात उठ जाते हैं और फिर उन्हें कुछ खाने की इच्छा होती है। इनमें उन लोगों की संख्या अधिक होती है, जो आमतौर पर दोपहर का नाश्ता या दोपहर का भोजन छोड़ देते हैं।

सीक्रेटिव स्वभाव

नाइट ईटिंग सिंड्रोम का स्वभाव अधिकतर सीक्रेटिव होता है। दरअसल, वह अपनी नाइट ईटिंग की बात जल्दी से किसी से शेयर नहीं करते। ऐसे व्यक्तियों में अधिकतर सीक्रेटिव स्वभाव देखा जाता है। हालांकि यह नियम सभी व्यक्तियों पर लागू नहीं होता।

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