चंद्रयान 2: आखिर क्यों रखा गया था लैंडर का नाम ‘विक्रम’ और रोवर का नाम ‘प्रज्ञान’, जानें इसका रहस्य

चंद्रयान 2: आखिर क्यों रखा गया था लैंडर का नाम ‘विक्रम’ और रोवर का नाम ‘प्रज्ञान’, जानें इसका रहस्य

इसरो का चंद्रयान 2 मिशन एक सैसा मिशन था जो कि अपनी सफलता से नया इतिहास रच सकता था क्योंकि इसी के साथ ही भारत पहला देश होता जो चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने वाला होता। हांलाकि चाँद की सतह पर लैंडिंग करने से कुछ किलोमीटर पहले ही इसरो का चंद्रयान 2 से संपर्क टूट चुका था। चंद्रयान 2 के सॉफ्ट लैंडिंग की जिम्मेदारी लैंडर ‘विक्रम’ की थी जो रोवर ‘प्रज्ञान’ को चाँद की सतह पर उतारता। क्या आप जानते हैं कि आखिर इसरो ने लैंडर का नाम ‘विक्रम’ और रोवर का ‘प्रज्ञान’ क्यों रखा था। आइये आज हम बताते हैं आपको इसका रहस्य।

चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता है। ‘विक्रम’ लैंडर का वजन 1,471 किलो ग्राम है। यह 650 वॉट बिजली जनरेट कर सकता है। इसे चंद्रमा की सीमा में एक दिन  तक काम करने के अनुसार तैयार किया गया है। चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है। विक्रम लैंडर में बेंगलुरू के पास स्थित इसरो के IDSN सेंटर से संपर्क करने की भी क्षमता है। इसके अलावा यह प्रज्ञान रोवर और ऑर्बिटर से भी संपर्क कर सकता है।


इसी के साथ ही रोवर के नाम की बात की जाए तो वैज्ञानिक भारत की परंपरा को भी मानते हैं। हमारी भाषा संस्कृत से उन्होंने ये नाम लिया है। इसरो ने बताया है कि प्रज्ञान का अर्थ होता है ‘बुद्धिमता’ । प्रज्ञान रोवर को चंद्रमा की सतह पर अपनी बुद्धिमता का परिचय देना है। वहां कई चीजों का पता लगाना है। प्रज्ञान रोवर में 6 रोबोटिक पहिये हैं। यह करीब 500 मीटर तक सफर कर सकता है। काम करने के लिए प्रज्ञान सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। यह सिर्फ लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित कर सकता है।

 

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